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Tujhe Jaane ko kaha

ख़ता मैंने की या सितम मुझ पर हुआ,
तुझे जाने को कहा.. तू लौट कर ना आया.
तेरे जाने का ग़म भी क्या करुँ?
जो लौटा ही नहीं, वो कहाँ मेरा साया?

Arsaa hua...

अरसा हुआ तुझे नज़रें चुराये,
बहरहाल, चाय के प्याले में तेरा ही अक्स है.
पर
मयस्सर नहीं अब हमसे आंखें चार करना,
ना तेरे इंतज़ार में आज ये शख्स है.

Raasta

माना, उस दोराहे पर हम दोनों बँट गए,
पर जितना साथ काटा, वो रास्ता हसीन था

Mana uss dorahe par hum dono bat gaye,
Par, jitna saath kaata, vo raasta haseen tha.

आदतों में शुमार

Quoting her, where these lines originted.
She: "dont make anyone...including me, ur habit"

अपनी आदतों में ना कर मुझे शुमार,
कल हो ना हो.. अपना ये क़रार.
नसीब का रक़्स किस ओर ले जायेगा..इस से ना-वाक़िफ़  हैं हम,
तेरे मेरे दर्मियाँ आ ना जाये वो दरार.

मौजूदगी तेरी - आदत नहीं, नशा हैं मेरा.
सुरूर बे-इन्तेहा सर चढ़ा है तेरा.
खुशियाँ न्यौछारना अख़लाक़-ए-नसीब नहीं ,
कल की खातिर, आज ना छीन प्याला-ए-मुस्कान मेरा.

मोहब्बत ना कर

इतनी मोहब्बत ना कर ऐ ज़माने,
कितनी लम्बी है ये रात, कौन जाने?
मायूसियां छा जाएँगी तेरी तन्हाईयों में,
इसका इल्म है तुझे, तू माने.. ना माने.

नूर-ए-एहसास

खुद की हक़ीक़त को अनसुना सा कर दूँ, पर,
तेरी रूह की आरज़ू  की मुझको खबर है.
तेरी छुअन को कैसे कुरेदूँ  ना,
तेरा नूर-ए-एहसास ही इस कदर है.

इश्क़ में माफ़ी नहीं होती.

बंदगी में रब्ब की वादा-खिलाफी नहीं होती,
मसरूफियत यार के नाम की कभी काफी नहीं होती.
दरिया-ए-इश्क़ की गहरायी को माप पाया है कौन,
इसमें बेपरवाह जुनूनीयत तो है, पर... माफ़ी नहीं होती.