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गुस्ताखियाँ मेरी

गुस्ताख़ होने से मेरे, रुस्वा तो हुआ ज़माना.
पर तन्हाइयों में सिसकियों का सबब, सूझता भी ना था.
कब तक शिरक़त करते लहू-लुहान दिल के जनाज़े में?
जनाज़े तक में, तकब्बुर से कोई चूकता भी ना था.

Glossary:
सबब = कारण , Cause
शिरक़त = शामिल होना, join
तकब्बुर = अहंकार, arrogance

An extension and my perspective to Nirjhra's post.

Wafaa ka zeher

शिद्दत से छाया था ख़ुमार इक हसीं  का,
बादस्तूर चला था सुरूर नाज़नीं का.
इक रोज़ ज़हर दिया, उसने इश्क़ के नाम से,
आज भी चखता हूँ, स्वाद उस करीम का.

Kuch Der Tthahar

रुस्वा तो तूने करना ही है, कुछ देर तो ठहर।
बा-दस्तूर वस्ल-ए-यार मुमक़िन नहीं, कुछ देर तो ठहर।
जुदाई का आलम अगले मोड़ से है झाँक रहा,
झपक भर का ये साथ छीन नहीं, कुछ देर तो ठहर।

Tujhe Jaane ko kaha

ख़ता मैंने की या सितम मुझ पर हुआ,
तुझे जाने को कहा.. तू लौट कर ना आया.
तेरे जाने का ग़म भी क्या करुँ?
जो लौटा ही नहीं, वो कहाँ मेरा साया?

Arsaa hua...

अरसा हुआ तुझे नज़रें चुराये,
बहरहाल, चाय के प्याले में तेरा ही अक्स है.
पर
मयस्सर नहीं अब हमसे आंखें चार करना,
ना तेरे इंतज़ार में आज ये शख्स है.

Raasta

माना, उस दोराहे पर हम दोनों बँट गए,
पर जितना साथ काटा, वो रास्ता हसीन था

Mana uss dorahe par hum dono bat gaye,
Par, jitna saath kaata, vo raasta haseen tha.

Teri dooriyon ki vajah se

सब सुनसान है यहां, तेरी दूरियों की वजह से.
इक तूफाँ है मेरे अंदर, तेरी दूरियों की वजह से.
सैलाब-ए-जज़्ब का रेशमी एहसास नदारद है मेरे आगोश से,
सर्द शाम की तपिश ले आ, जो दूर है... तेरी दूरियों की वजह से.